मैं ड्रीमर हूँ
सपना देखना मेरा पेशा है
सपना किसी तरीके़, सलीके़ को नहीं मानता
फिर तो यह भी सच है कि वो अपने ही तर्क से चलता है
लेकिन किसी सपने से अगर तख़्त हिलने लगे तो?
तो,
मत कहिए कि मेरा पड़ोसी बीमार है
उसके मान की हानि होती है
मत कहिए कि शहर में बंदर घुस आए हैं
यह अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र है
मत कहिए कि आज आसमान नीला है
यह उसके धर्म पर धावा है
मत कहिए कि आज मैं भूखा रह गया
यह राजद्रोह है
और, मत कहिए कि आज आपने अख़बार देख लिया है
यह आपकी नीयत पर सवाल है
तख़्त को हिलने से रोकिए,
वरना नींद खुल जाएगी।
Kya baat, sbandaar
ReplyDeleteधन्यवाद
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