अब किसी से मैं उसका हाल नहीं पूछता,
कुछ लोग मेरे सवाल में मतलब
और बात में काम ढूँढने लगे हैं।
रिश्तों के गलियारे में एक कोना भी था
जहाँ दिल की बातें रख दी जाती थी,
आज वे कोने सभी सँवरने लगे हैं।
वे दिन खो गए जब बातें गहरी थी
और दिल हल्का होता था,
अब हर बात में राज़ छुपने लगे हैं।
वो बस्ती कोई और थी, शायद लोग भी और थे
जहाँ बाहर आवाजाही थी, और जिनके भीतर चैन था,
आज आज़ादी की बयार में शोर बसने लगे हैं।
तेर-मेरे छूटे इन रिश्तों के सहर में
जहाँ ज़िदगी कभी खुलकर बरसती थी,
उस ज़मीं को लोग अब सहरा कहने लगे हैं।
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अगस्त 2023

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