मेरा चश्मा

फ़ोटो - प्रभाष के दत्ता

मुझे एक चश्मा चाहिए
इस दुनिया को देखने के लिए
मैंने अपना तोड़ दिया।

एक चश्मा था मेरे घर के लिए
पत्नी को न भाया
देश निकाला दे दिया उसे
काल-कोठरी में फेंक दिया उसे
अब अंधेरे में क्या दिखे, क्या देखे चश्मा?

एक चश्मा था मेरे बन्धु-बान्धवों के लिए
राखी का क़र्ज़ न चुकाया चश्मा
अपना फ़र्ज़ न निभाया चश्मा
फोड़ दिया उसको
एक आँख से अब क्या देखे चश्मा
किस काम का ये काना चश्मा?

एक चश्मा था माता-पिता के लिए
बचपन में तो ख़ूब सुझाया
बड़ा हुआ तो पर्दा लगाया
न देखा ख़ुद, न दिखाया चश्मा
बेटी ने मेरे स्याही पोती
शीशा बना मेरा प्यारा चश्मा
हाय! पितृ-ऋण न चुकाया चश्मा।

एक चश्मा था मेरे ख़ुद के लिए
बिल्कुल बे-फ़िट
नज़दीक की नज़र कमज़ोर थी
दूर का मैंने लगाया चश्मा
दूर-दृष्टि चली गई
सूक्ष्म जो कभी रही नहीं
तभी तो, मैंने तोड़ा चश्मा।

चाहिए मुझे एक आवारा चश्मा
अपनी अंधी आँखों के लिए।

19.02.2013
नई दिल्ली

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