ईश्वर को मरना होगा

© Hindnagar

डर, भय, ख़ौफ़
ये सिर्फ़ शब्द नहीं हैं
मेरी कहानी है।
मेरी पहचान हैं।

डर, मेरी पहचान है
मैं डरता हूँ
हमेशा से डरता रहा हूँ
हर चीज़, हर बात से डरता रहा हूँ।

मौत का डर रहता है मुझको
बेनिशाँ हो जाने के डर से घबराता जाता हूँ,
जीने से भी डरता हूँ
और, जीवन के संघर्ष से भी।

पिता से डरा मैं,
पड़ोसियों से, समाज से डरकर रहा
भाई, बंधुओं से भी डर कर रहा
माँ से, और बहन से भी डरा;
जुम्मन, पीटर और शेष से भी डरा
और, इस बात से भी डरा कि कह सकूँ
कि मैं डरता हूँ। डरपोक हूँ।

अँधेरे से डरा, रोशनी से भी डरा
रात को झींगुरों की आवाज़ से डरा
जून की दोपहरी में ख़ाली घर से डरा
गली के सन्नाटे से डरा
बिल्ली की आँख और उसके खिसियाने से भी डरा,
कुत्तों के पहरे से डरा
तो पत्तों की कड़कड़ाहट से भी डर गया।
साँस लेने से डरा,
कहीं बंद न हो जाए, यह सोचकर डर गया।

आँखें खोलकर डरा तो मूँदकर भी ख़ूब डरा
डरने की एक भी विधा न छोड़ी मैंने।

छुटपन में कंबल की चीख़ से डरा,
कभी जो अगर डटा तो डटने से ही डर उठा।
भागा तो भागने का डर
पढ़ाई की तो टीचर का ख़ौफ़
फ़ेल होने का डर
डर तो कामयाब हो जाने का भी था,
माता, पिता, बड़े बुज़ुर्गों के अहसान का डर होता था
तो, कभी दोस्तों के उपकार का डर,
नौकरी की तो बॉस का डर
बॉस बना तो बड़े बॉस का डर
वोट डाला तो जीत-हार का डर
सरकार का डर
दरबार का डर।

पैसे का डर, टैक्स का डर
भूत की फ़िक़्र में भविष्य का डर भी रहा।
काश डर का भी एक इंश्योरेंस होता!
पिता और पति होने के डर का बीमा करवाता
दुआ का प्रीमियम भरता।

लेकिन, ईश्वर और अल्लाह से डरता हूँ,
पंडित, मुल्ला और पादरी से भी डरता हूँ,
घंटी, मंत्र और नमाज़ से डरता हूँ।
तिलकधारी और नमाज़ी का डर तो है ही,
भक्त और दरबारी से डरता हूँ।

विचार और विचारकों का भी ख़ौफ़ रहता है।
बचपन में अज्ञान का डर पिलाया गया
और अब, ज्ञान से भय और ज्ञानियों का डर रहता है।
दूध देने वाली गाय भी डराती है
और मज़े देने वाली क़िताब भी।
जिन शब्दों को शाश्वत बताया सबने
वही सबसे भयानक निकला।
मित्र को अमित्र किया,
दंगे और फ़साद कराया।

सोचता हूँ अपनी क़िताब लिख डालूँ
नई रीत एक चलाऊँ
नए शब्द बेचूँ
नई तक़रीर गढूं
नया ईश्वर बनाऊँ
नया अल्लाह दिखाऊँ
लेकिन, डर?
इस डर का क्या करूँ
कहीं नई रीत, नए शब्द, नए ईश्वर के साथ
पुराने का नया डर रंग जमा दे तो?
फिर से कोई डर में जिएगा
फिर वही कुचक्री चक्र चलेगा।
नहीं!
ईश्वर को मरना होगा,
उसको मारना होगा,
अगर इंसान को जीना है।

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